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Bye bye 2024

*उम्र* की डोर से फिर 
एक मोती झड़ रहा है....
तारीख़ों के जीने से 
_दिसम्बर फिर उतर रहा है.._
कुछ चेहरे घटे,चंद यादें 
जुड़ी गए वक़्त में....
उम्र का पंछी नित दूर और 
दूर निकल रहा है..
गुनगुनी धूप और ठिठुरी 
रातें जाड़ों की...
गुज़रे लम्हों पर झीना-झीना 
सा इक पर्दा गिर रहा है..
ज़ायका लिया नहीं और
फिसल गई ज़िन्दगी...
वक़्त है कि सब कुछ समेटे
बादल बन उड़ रहा है..
_फिर एक दिसम्बर गुज़र रहा है.._
_बूढ़ा दिसम्बर, जवां जनवरी के कदमों मे बिछ रहा है..._
_लो अब इस सदी को पचीसवाँ साल लग रहा है...._💖🎻🌹

*साल का अंतिम माह दिसंबर है*
 *दि*-- *दिलों का*
*सं*-- *संबध*
 *ब*-- *बरकरार*
 *र*-- *रहे....*

 हम सब का साथ हमेशा बना रहेl
🥰❤️❤️🙏🙏

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